चन्द्रगुप्त मौर्य जीवनपरिचय । चन्द्रगुप्त मौर्य कौन थे ?

चन्द्रगुप्त मौर्य जीवनपरिचय । चन्द्रगुप्त मौर्य कौन थे ?

मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य की गिनती भारत के महान राजाओं में की जीती है। सैनिक उपलब्धयों के साथ साथ उनकी महानता इस बात से भी पता चलती थी । कि वह भारत का ऐसा पहला सम्राट था जिसने भारत में राजनीतिक एकता का सूत्रपात किया।
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प्रारम्भिक जीवन –

बहुत दुःख की बात है कि हमे चन्द्रगुप्त जैसे महान शासक के प्रारम्भिक जीवन के बारे में जानने के लिए हमारे पास ना ही  ऐतिहासिक और प्रमाणिक स्रोतों का अभाव हैं। फिर भी कुछ स्रोतों के माध्यम से हम उनके बारे में थोड़ा बहुत जान सकतें है।

1. ब्राह्मण साहित्य –

ब्राह्मण साहित्य के अंतर्गत आने वाले विभिन्न ग्रन्थों से चंद्रगुप्त के विषय मे भिन्न भिन्न जानकारी प्राप्त होती है , परन्तु अधिकांश ग्रन्थो में उनको नंदवंशीय अथवा नन्द राजा की शुद्र पत्नी से उत्पन्न हुआ बताया गया है। परन्तु जैसा कि पहले भी लिखा गया है ब्राह्मण साहित्य को इस सम्बंध में इस प्रमाणिकता को स्वीकार नही किया गया।

2.  बोद्ध साहित्य –

बौद्ध ग्रन्थ महावंश टीका से चंद्रगुप्त मौर्य के प्रारम्भिक जीवन के विषय मे बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है । इस ग्रन्थ के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य मोरिय नगर के राजा के पुत्र थे । इस ग्रन्थ के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य जिस समय अपनी माँ के गर्भ में थे तब मोरिय नगर पर एक शक्तिशाली राजा ने आक्रमण कर मोरिय राजा को मार डाला था । मोरिय रानी किसी प्रकार भागकर अपने भाइयों के पास पाटलिपुत्र पहुची। और वही उसने उस बच्चे को जन्म दिया और कुछ दिन बाद उसे एक मवेशी के घर के पास रख कर चली गयी, जिसे चन्द्र नामक कृषक ने उसकी सेवा की, जिसके कारण उस बच्चे का नाम चंद्रगुप्त ( चन्द्र द्वारा  रक्षित ) पड़ा ।

3. जैन साहित्य –

जैन ग्रन्थ परिशिष्टपर्वत से भी चंद्रगुप्त के प्रारंभिक जीवन पर प्रकाश डाला जा सकता है। हेमचन्द्र कृतं इस ग्रन्थ के अनुसार चंद्रगुप्त मयूर पोषकों के सरदार के पुत्र थे। अपने गांव के बालको के साथ वह  खेला करते थे । एक बार वे इसी तरह खेल खेल रहे थे तो उनको चाणक्य ने देखा, चंद्रगुप्त की परीक्षा लेने के लिए चाणक्य ने उनसे कुछ भेंट मांगा । तो चंद्रगुप्त मौर्य ने गांव की ओर इशारा करते हुवा कहा इसे ले जाव तुमको कोई कुछ नही कहेगा । इस बात पर चाणक्य चंद्रगुप्त से बहुत प्रभावित हुआ और उसको अपने साथ ले गये। कालान्तर में चाणक्य व चंद्रगुप्त ने हिमवत्कुट के राजा पर्वरक की सहयता से नन्द राजा को परास्त किया।

4. यूनानी वृतांत –

यूनानी वृतांनतो में चंद्रगुप्त के प्रारंभिक जीवन का उल्लेख मिलता हैं केवल जस्टिन ने लिखा है । कि उनका जन्म साधारण तरीक़े से हुआ था। जस्टिन के इस बात का पता जैन और बौद्ध धर्म के ग्रन्थों में भी देखने को मिलता है जब चंद्रगुप्त का जन्म हुआ तो उसके घर की स्थिति बहुत अच्छी नही थी साधारण ही थी। उनका जन्म राजसी तथा वैभव से सम्प्पन परिवार में नही हुआ था ।

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